एक दिन
डर की सारी बाज़ी जीत लूंगा मैं एक दिन
सुनहरा सा सपना अपना सच होगा एक दिन
वक्त चाहे हों कितना भी जटिल
झुक जाएंगे ज़िद पर दर दर वह मुश्किल
मैं जानता हूं कोशिश मेरी खराब है
लेकिन स्वयं तो संघर्ष का भी नवाब है
कुछ करना होता है थोड़ा नहीं ज्यादा कठिन
पर प्रयास के बल होता बहुत कुछ शुद्ध कर गिन
मैं बढूंगा मैं चलूंगा निड़र सभी मील
देख के सब चौंक जाएंगे पग जाएंगे हिल
मुझे विश्वास है
मैं सफल हो आऊंगा एक दिन
समस्या की डाली तोड़कर
एक कोमल सी रोशनी वाला सवेरा लाऊंगा हर दिन
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