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 जिंदगी में  रोया कई बार मनाया हर बार कोशिश की थी हर एक बार फिर भी लगता है उन्हें नाटक बार बार चलो सोचते हैं, विश्वास सबकी नैया पार करते हैं कुछ, अभ्यास एक नहीं हजारों बार वक्त नहीं, अपनों को मन की हार दूर चला , सपनों को याद कर , यार अच्छा नहीं हूं मैं बेवकूफों का सरदार मुसीबत को बुलाकर तो देख मैं तेरा हवलदार

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शायरी 1

एक बार और

चला था मैं

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क्या ?

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मांझी

एक दिन

देह का सत्कार

कुछ कर दिखाना है