मैं

मैं,
कुछ नहीं कर सकता
सिर्फ सोचता रहता हूं
बड़ी- बड़ी बातें हैं, स्वप्न गहरी
कि हमेशा फेकता रहता हूं


देखता हूं इस समाज को
सोचता हूं कुछ कर लू
पर वक्त नहीं मिलता
हर क्षण सोता जो रहता हूं


किसान पल पल बीज बोता है
साहस कि, धैर्य कि, मेहनत कि
प्रकृति इसे सताती रहती हैं
पर कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता
कि मैं सिर्फ देखता रहता हूं


सब कहते है,मेरे अपने भी
तू कुछ कर नहीं सकता
पर ऐसा नहीं है
कि मैं सिर्फ बोलता रहता हूं


बहुत कुछ करना चाहता हूं, मैं भी
डरता हूं परिवर्तन से नहीं
परिवर्तन में परिवर्तन से
कि मैं सिर्फ सोचता रहता हूं


अमीर बनूंगा एक दिन
धन से नहीं दिल से
खो दूंगा आम अमीर खुशी
कि मैं सिर्फ भौंकता रहता हूं


आजादी छोड़ चली जाएगी
बंध जाऊंगा शौक के बंधन में
महान बनूंगा खो दूंगा सबकुछ
कि मैं सिर्फ डांट सुनता रहता हूं


गुरू का तह गुस्सा
मां - बाप की डांट
अब बताईए आप, सीखे कैसे
कि मैं सिर्फ गलती करता रहता हूं

Comments

Popular Posts