चला था मैं

चला था मैं
एक सुनहरे रास्ते पर
स्व्पन सजा सोच लेकर
बड़ी दुखद प्यारी सी
मेहनत अपना खटास लेकर
सिर्फ बोलता रहता हूं
मत खिलाओ औरौं को हवा देकर


पता नही मुझे
किस्मत साथ है या नहीं
समय झूठ का या सही
किसका साथ लेकर
किनका साथ छोड़ कर
जिसका विश्वास तोड़कर
जिनका भला या बुरा कर

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